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भारत में मानवाधिकार

  भारत में मानवाधिकार  भारत में मानवाधिकार  द्वितीय विश्वयुद्व की समाप्ति के बाद 1948 में 48 देशों के समूह ने समूची मानव - जाति के मूलभूत अधिकारों की व्याख्या करते हुए एक चार्टर पर हस्ताक्षर किये थे । इसमें माना गया था कि व्यक्ति के मानवाधिकारों की हर कीमत पर रक्षा की जानी चाहिये । भारत ने भी इस पर सहमति जताते हुए संयुक्त राष्ट्र के इस चार्टर पर हस्ताक्षर किये । हालाँकि देश में " धिकारों से जुड़ी एक स्वतंत्र संस्था बनाने में 45 वर्ष लग तब कहीं जाकर 1993 में NHRC अर्थात् राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग अस्तित्व में आया जो समय - समय पर मानवाधिकारों के हनन के संदर्भ में केंद्र तथा राज्यों को अनुशंसाएँ भेजता है ।   ★ वर्तमान समय में देश में जिस तरह का माहौल आए दिन मिलता है ऐसे में मानवाधिकार और इससे जुड़े आयामों पर चर्चा महत्त्वपूर्ण हो जाती है । देश भर में मॉब लिंचिंग की घटनाएँ , बिहार के मुजफ्फरपुर और उसके तुरंत बाद उत्तर प्रदेश के देवरिया में शेल्टर होम की बच्चियों के साथ हुए वीभत्स कृत्य देश में मानवाधिकारों की धज्जियाँ उड़ाते दिखते हैं ।    ★ कई विवादास्पद नाओ...

आज का सोशल मीडिया

 

🙏आज का सोशल मीडिया🙏

आज से लगभग 10 वर्ष पहले सोशल मीडिया इतना पॉपुलर नहीं था उस समय ज्यादातर अखबार की खबरें पढ़ी जाती थी इसलिए उस समय लोग टीवी की खबरें बहुत कम देखते थे फिर भी उस समय जो न्यूज़ आती थी टीवी और अखबार के माध्यम से बिल्कुल सच्ची आती थी झूठी खबरें उस समय कोई छापता भी नहीं था
लेकिन पिछले कुछ वर्षों से भारत की सोशल मीडिया बहुत पॉपुलर होई है यह तो आपको भी पता है लेकिन आज के समय में सोशल मीडिया की तरफ से जो न्यूज़ आती है उसमें झूठ ज्यादा और सच कम है। एक न्यूज़ 30 या 20 मिनट के आती है जिस में 10 बातें सच में ओर 20 बातें झूठ आती है और वह झूठ कहेंगे इस तरह कि हमें पता ही नहीं चलेगा झूठ बोला या सच। इस 30मिनट की न्यूज़ में हम भी कुछ गलती कर देते हैं जो सच कहेंगे वह बातें हम भी भूल जाते हैं झूठ वाली बातें हमें भी याद रह जाती है फिर इस तरह पूरे देश में झूठी खबरें फैल जाती है झूठी खबरों के कारण भारतीय सोशल मीडिया पॉपुलर होई है।

हमारे देश की जनता ने सोशल मीडिया को एक और दूसरा नाम दे दिया है उसका नाम है 'गोंदी मीडिया"अब गोदी मीडिया की तरफ से जो भी खबर आएगी 70% झुठ आएगी।

सोशल मीडिया पर कुछ चैनल एसे भी है, जो सच खबरें देते हैं लेकिन कुछ समय बाद जब वह भी फेमस हो जाएंगे तब गोदी मीडिया की तरह झूठ बोलना शुरू कर देंगे।

अब गोदी मीडिया झूठ क्यों बोल रही है क्योंकि इससे सरकार ने खरीद रखा है अब जो सरकार कहेंगी वहीं यह करेगे, क्योंकि इसे सरकार झूठ के अलग से पेसे देते हैं
लेकिन फिर भी आज इस महामारी के अंदर सोशल मीडिया का कार्य जारी है, देश के बड़े बड़े अमीर लोगों के कार्य जारी है, जिनकी सरकारी नौकरी है उनकी भी तनख्वाह जारी है, लेकिन इस महामारी के अंदर किसानों का कार्य रुका हुआ है उन्हें सरकार कहती है 'घर में रहो सुरक्षित रहो',stay home stay safe,तभी हम इस महामारी से जंग जीत पाएंगें। लेकिन जो गरीब दिन को कमा कर शाम को अपने परिवार वालों को पेट भरता था, आज उन गरीबों का क्या हाल होगा, लेकिन फिर भी उन गरीबों ने लॉकडाउन के लिए कुछ पैसे जमा कर रखे होंगे। तो फिर वह सामान लेने बाजार जाएंगे बाजार में पहुंचेंगे नहीं उससे पहले चौराहे पर पुलिस वाले मिल जाएंगे  कहेंगे पहले हमारा पेट भरो फिर आप का अब अगर उनका पेट नहीं भरे तो पीटना शुरू कर देते हैं फिर आगे बाजार में जाएंगे तो दुकानदार मिल जाते हैं वह भी 20 का सामान  50 में देना शुरू कर देंगे। यह इस महामारी या फिर कोरोना काल की सच्चाई है, लेकिन आज इस महामारी के अंदर गोदी मीडिया जितना पैसा कमा रही है उनका अंदाजा नहीं लगा सकते।

क्योंकि सरकार उन्हें पेसे अलग से दे रही है और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की तरफ से उनको अलग से पैसा मिलता है आज हम लोग जो न्यूज़ देख रहे हैं उनकी जो एमबीmb खत्म होते हैं वह सारीmb एमबी उनके पास जाती है और हमारी तो एक दो 1,2 न्यूज़ देखने से सारी एमबी खत्म हो जाती हैं
आज अगर गोदी मीडिया अपनी कमाई का तीसरा हिस्सा गरीबों में देना शुरू कर दे तो आने वाले समय में हमारे देश से गरीबी और कोरोना दोनों का नाम मिट जाएगा। हमारा फर्ज है गरीबों की मदद करना। जब हमारे देश में ऑक्सीजन की कमी थी तब हमारे पड़ोसी देश ने हमारी मदद की थी आज हमें चाहिए कि हम गरीबों की मदद करें। देश के नागरिक होते हुए हमारा फर्ज बनता है देश की सेवा करना गरीबों की सेवा करना। अगर आपके पास कोई गरीब परेशान हो तो उसकी मदद जरूर करें। अगर आप मदद नहीं कर सकते तो इस पोस्ट को शेयर करे
धन्यवाद
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